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Defence Technology: रक्षा प्रौद्योगिकी भारत की आधुनिक सुरक्षा का आधार

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रक्षा प्रौद्योगिकी में हाल के समय में हाइपरसोनिक मिसाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), और ड्रोन तकनीक ने क्रांति लाई है। भारत ने हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) और स्वार्म ड्रोन जैसी तकनीकों का सफल परीक्षण किया है। अग्नि-5 मिसाइल और तेजस जैसे स्वदेशी रक्षा उपकरणों का विकास भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रहा है। ये प्रौद्योगिकियां राष्ट्रीय सुरक्षा और आधुनिक युद्ध प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।


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 DRDO (डिफेंस रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन) रक्षा मंत्रालय का R&D विंग है।


DRDO 

  • DRDO का गठन 1958 में भारतीय सेना के तकनीकी विकास प्रतिष्ठान (TDEs) और रक्षा विज्ञान संगठन (DSO) के साथ तकनीकी विकास एवं उत्पादन निदेशालय (DTDP) के समामेलन से किया गया था।
  • ध्यये वाक्य :- बलस्य मूलम् विज्ञानम्
  • मुख्यालय :- नई दिल्ली
  • वर्तमान अध्यक्ष : समीर वी. कामत

भारत के रक्षा मंत्रालय की संरचना

  1. रक्षा विभाग (डीओडी)
  2. रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी)
  3. रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग (DRDD)
  4. भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग(DESW)

रक्षा मंत्रालय से संबंधित PSU

S.N. रक्षा मंत्रालय(PSU)
 1मजगाँव डाक शिप लिमिटेड
मुख्यालय :- मुम्बई
2गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई)
मुख्यालय :- पश्चिम बंगाल
3गोवा शिप याड लिमिटेड
मुख्यालय :- गोवा
4भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड
मुख्यालय :- बेंगलुरु
5Hindustan Aeronautics Limited (HAL)
स्थापना :- 23 दिसम्बर, 1940
मुख्यालय :- बेंगलुरू
2024 में HAL को महारत्न कम्पनीका दर्जा दिया गया।
वर्तमान अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक :- डॉ. डी. के सुनील
6BDL (भारत डायनामिक्स लिमिटेड)
गठन :- 16 जुलाई, 1970
मुख्यालय :- हैदराबाद
यह एक PSU है जो रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
वर्तमान अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक : कमोडोर ए. माधवराव


भारतीय सेना की प्रमुख मिसाइलें और उनकी विशेषताएं


अस्त्र मार्क-1 (Astra Mark-1)

  • यह एक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है।
  • गति :- 4.5 मैक
  • मारक क्षमता :-80-110 km
  • यह मिसाइल लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, क्रूज मिसाइल, ड्रोन आदि जैसे हवाई लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम है।
  • इसे वायुसेना के सुखोई 30 NKI, तैजस और नौसेना के मिग 29 जैसे लड़ाकू मिशन पर लगाया जायेगा।
  • भारतीय वायुसेना ने भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) को 200 'अस्त्र मार्क-1' मिसाइल के उत्पादन को मंजूरी दी है।

मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (MP-ATGM)

  • यह पोर्टेबल मिसाइल DRDO द्वारा विकसित किया गया है।
  • परीक्षण :- 13 अगस्त, 2024 को जैसलमेर जिले की पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारत ने मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल हथियार प्रणाली का सफल परीक्षण किया।
  • MP-ATGM हथियार प्रणाली का वजन 14.5 kg है तथा इसकी लम्बाई 4.3 फीट है।
  • रेंज:- 200 मीटर से 2.5 km है।

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पिनाका रॉकेट लॉन्चर

  • DRDO द्वारा गाइडेड पिनाका हथियार प्रणाली का सफल उड़ान परीक्षण 14 नवम्बर, 2024 को किया गया।
  • यह परीक्षण तीन चरणों में PSQR (Provisional Staff Qualitative Requirements) के तहत किया गया।
  • भारत सरकार द्वारा पिनाका राकेट को अर्मेनिया को निर्यात किया गया है।

एडी-1 बैलिस्टिक मिसाइल

  • DRDO ने बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली (Ballistic Missile Defence System) के द्वितीय चरण का परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर में 24 जुलाई, 2024 को सफलतापूर्वक किया।
  • एंडी-1 एक बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइल है, जो किसी भी बैलिस्टिक
  • मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर देगी।
  • एंडी-1 दो चरणीय, ठोस प्रणोदक मिसाइल है।
  • यह लगभग 5000 km की दूरी तक परमाणु क्षमता संपन्न बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर सकता है।

वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (VLSRSAM)

  • Vertical Launch Short Range Surface to Air Missile
  • DRDO और भारतीय नौसेना द्वारा सतह से हवा में मार करने वाली VLSRSAM का सफल उड़ान परीक्षण किया गया है।
  • इसका परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर के एकीकृत परीक्षण रेंज से 12-13 सितम्बर, 2024 को किया गया। इसकी गति 4.5 मैक है!
  • इस मिसाइल को DRDO और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) ने मिलकर बनाया है।

आकाश - NG

  • DRDO द्वारा एकीकृत परीक्षण रेंज, चांदीपुर (ओडिशा) में नई पीढ़ी की मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया।
  • यह मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है।

परमाणु मिसाइल अग्नि-4

  • निर्माण :- DRDO और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित ।
  • परीक्षण :- DRDO ने अग्नि-4 मिसाइल का सफल परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित रेंज में 6 सितम्बर 2024 को किया।
  • अग्नि-4 लम्बी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (LRBM) है, जिसकी रेंज (मारक क्षमता) 4000 किलोमीटर है।
  • • लम्बाई :- 20 मीटर ।  • वजन :- 17000 किग्रा ।
  • अग्नि-4 :- सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है।
नोट :- इसका पहला परीक्षण वर्ष 2011 में ओडिशा के तट पर व्हीलर द्वीप से किया गया था।
 मिसाइल क्षमता रेंज 
 Agni-1छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल700-1000 km
 Agni-IIमध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल2000-3500 km
Agni-IIIमध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल3500-5000 km

मिशन दिव्यास्त्र

  • अग्नि-5 मिसाइल का नया अवतार
  • मारक क्षमता :- 5000 किलोमीटर
  • DRDO द्वारा विकसित 100% स्वदेशी
  • तकनीक :- MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेटली टाइगेटेबल री-एंटी व्हीकल)
  • अग्नि 5 मिसाइल जमीन से जमीन पर मार करने वाली भारत की पहली मिसाइल है।

अग्नि प्राइम

  • अग्नि प्राइम को अग्नि-1 के स्थान पर तैनात किया है।
  • अग्नि प्राइम उच्च तीव्रता वाले विस्फोटक, थर्मोबेरिक या परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है
  • यह मिसाइल एक साथ कई टारगेट भेद सकती है।
  • DRDO द्वारा विकसित एक बैलिस्टिक मिसाइल है (मारक क्षमता 2000 किलोमीटर)

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रुद्रम - II

  • DRDO द्वारा विकसित मिसाइल है।
  • यह एक एंटी रेडिएशन मिसाइल है।
  • हवा से सतह पर मार करने वाली हाइपर सौनिक मिसाइल है।
  • परीक्षण - ओडिशा मे सुखोई - 30 MKI विमान से
  • रुद्रम II - एक स्वदेशी रूप से विकसित ठोस ईधन से चलने वाली वायु प्रक्षेपित मिसाइल प्रणाली है।
  • यह शत्रु के कई प्रकार के हथियारों को नष्ट करने में सक्षम है।

भारत की पहली लम्बी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल

  • 16 नवम्बर, 2024 को DRDO ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (ओडिशा) से भारत की पहली लम्बी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया।
  • रेंज :- 1500 Km
  • इस परीक्षण के साथ ही भारत, चीन, रूस और अमेरिका सहित उन कुछ देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिन्होंने हाइपरसोनिक मिसाइल की ऐसी तकनीक हासिल की है।
  • हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic Missile) ध्वनि की गति से 5 गुना तेज रफ्तार से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है तथा एंटी मिसाइल सिस्टम या एयर डिफेंस सिस्टम इन्हें ट्रैक नहीं कर पाते।
  • अभी इस मिसाइल का नाम सामने नहीं आया है।

भारतीय सेना के मुख्य ड्रोन


हर्मीस - 900

  • भारतीय सेना 'हर्मीस-900' ड्रोन को पाकिस्तान सीमा पर निगरानी क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए तैनात करने जा रही है।
  • इसे 'दृष्टि-10' ड्रोन के नाम से भी जाना जाता है।
  • भारतीय सेना 'हर्मीस-900' ड्रोन को भटिण्डा बेस पर तैनात करेगी।
  • यह 2000 km तक की दूरी तय कर सकता है।
  • हर्मीस-900 स्टारलाइनर 30 घंटे से अधिक समय तक उड़ान भरने में सक्षम है।

नागास्त्र - 1

  • नागास्त्र -1 एक मानव पोर्टेबल हथियार बंद ड्रोन सिस्टम है।
  • नागास्त्र एक प्रकार की "लॉइटरिंग म्यूनिशन" है। यह निर्दिष्ट क्षेत्र के ऊपर मंडरा सकता है, लक्ष्य की पहचान कर सकता है और उस पर सटीक हमला करने से पूर्व उसे लॉक कर सकता है।
  • इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड द्वारा निर्मित।
  • भारतीय सेना को स्वदेशी आत्मघाती ड्रोन "नागास्त्र-1" की पहली खेप जून 2024 में मिली।
  • यह ड्रोन 60 मिनट तक बिना किसी परेशानी के उड़ान भर सकता है।
  • यह 15 km की रेंज में निगरानी कर सकता है तथा यह 1 kg से 4 kg का वारहेड ले जा सकता है।
  • इसमें अबॉर्ट, रिकवर और रियूज की भी क्षमता है।
  • यदि लक्ष्य का पता नहीं चलता है तो ड्रोन को वापस बुलाया जा सकता है।

जोरावर टैंक

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारत के देशज रूप से विकसित मध्यम युद्धक टैक (MBT) जोरावर के प्रोटोटाइप का अनावरण 6 जुलाई, 2024 को किया।
  • यह पहाड़ियों पर तेज गति से चलने में सक्षम है।
  • निर्माण :- इसे DRDO और लार्सन एण्ड टुब्रो (L&T) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया।
  • नामकरण :- जनरल जोरावर सिंह डोगरा के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 1841 में चीन-सिख युद्ध के समय कैलाश मानसरोवर पर मिलिट्री एक्सपेडिशन किया था।
  • परीक्षण :- 13 सितम्बर, 2024 को जैसलमेर (राजस्थान) में किया गया।
  • गति :- 70 km/h


गौरव बम

  • लोंग रेंज ग्लाइड बम 'गौरव' एक 1000 किलोग्राम वजनी ग्लाइड बम है, जो हवा से प्रक्षेपित किया जा सकता है।
  • परीक्षण :- DRDO ने 'गौरव' का पहला उड़ान परीक्षण 13 अगस्त, 2024 को सफलतापूर्वक किया। यह परीक्षण भारतीय वायु सेना के सुखोई- 30 MK-I प्लेटफॉर्म से ओडिशा के तट पर किया।
  • विकास :- हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत ने गौरव का डिजाइन और विकास किया।
  • वजन :- 1000 kg
  • मारक क्षमता : 50-150 km

आधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियाँ: 

आधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियाँ विवरण 
 विद्युत रक्षकभारतीय थल सेना द्वारा इस एकीकृत जनरेटर निगरानी, संरक्षण एवं नियंत्रण प्रणाली का शुभारम्भ किया गया।
 एक्स - 59नासा और लॉकहीड मार्टिन द्वारा इस सुपरसोनिक विमान को लॉन्च किया गया है, जो ध्वनि की गति से 1.4 गुना रफ्तार से उड़ान भर सकता है।
 कान (KAAN)यह 'तुर्किए' का लड़ाकू विमान है। 'कान' तुर्किए का पहला स्वदेशी फाइटर जेट है।
तुर्किए ने पाँचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को बनाने में सफलता हासिल की है।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने हाई पॉवर लेजर हथियार का सफल परीक्षण किया है।
 ड्रैगनफायरइस एंटी-ड्रोन लेजर तकनीक को ड्रेगनफायर (Dragon Fire) नाम दिया गया है।
ड्रैगनफायर लेजर डाइरेक्टेड एनर्जी वेपन

निष्कर्ष:

भारत की मिसाइल प्रणाली, जैसे अग्नि-5, ब्रह्मोस, और आकाश, राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत कर रही है और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति कर रही है। उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियाँ, जैसे भारतीय थल सेना का विद्युत रक्षक और नासा का एक्स-59 विमान, भविष्य के युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इन नवाचारों से वैश्विक सुरक्षा और तकनीकी विकास में भी वृद्धि हो सकती है।

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